
1) मंदिर के गर्भ गृह में नित्य साफ सफाई, पोछे से फर्श साफ करना, पूजा के बर्तनों को नित्य साफ करना। उसके बाद मंदिर में धूप, दीपक जलाना।
2) मंदिर के प्रांगण ( बाथरूम एरिया से गेट तक ) कि साफ सफाई करना। प्रांगण में घास फूस उखाड़ना।
3) मंदिर के सभी धर्मशालाओं की सफाई। उसमे रखे कपड़ो, रजाई, गद्दे, कंबलों को धूप में सुखाना।
4) प्रांगण में फूल पौधों की गुड़ाई, देखरेख तथा नए पौधरोपण करना।
5) मंदिर की रखवाली (चौकीदारी) करना। सेवक को यह सुनिश्चित करना होगा कि मंदिर में ताले ठीक से लगे हों तथा दानपात्र सुरक्षित रहे। यदि मंदिर का कोई सामान चोरी या गुम हो तो सेवक तुरंत ही इस बात की सूचना संचालक मंडल को दे।
6) सेवक को मंदिर में दीपक, धूप, आरती नित्य सुवह शाम को करनी होगी। मंदिर में आने वाले भक्तों को प्रसाद वितरण, टीका, कलावा बाँधना। इस प्रक्रिया के दौरान सेवक कुर्ता धोती की पोशाक पहनेगा।
7) सेवक को भक्तों को सलाह देनी होगी वे चढ़ावा केवल दानपात्र में ही डालें। यदि कोई दान करना चाहे तो सेवक उसको प्राप्तिरसीद देगा। प्राप्ति रसीद रु.100/- से ऊपर रकम के लिए देना होगा। इस रकम को सेवक बाद में अधिकृत व्यक्ति को सौंप देगा।
8) यदि मंदिर में कोई यात्रा, पूजन, पाठ आदि का कार्यक्रम होगा तो सेवक को मंदिर तथा प्रांगण की सफाई के बाद छुट्टी करनी होगी। उस अवसर पर यजमान को सेवक को रु. 251/- रु. देना होगा। मंदिर में पूजा, नवरात्रि के समय सेवक पंडित नही होगा। मंदिर के रावल को अपील की जाएगी कि वह यजमान को कहे कि सेवक को रु. 251/- मंदिर की सफाई के लिए दे।
9) पानी की सुचारू व्यवस्था के लिए सेवक सुनिश्चित करे। बड़ी मरम्मत कार्य के लिए सेवक , मंदिर के कार्यकारी मंडल से संपर्क करे।
10) यदि कोई व्यक्ति , कार्यकारिणी सदस्य, ग्रुप सदस्य सेवक से वादविवाद करता है तो सेवक उनसे कोई भी वादविवाद न करे। इसकी सूचना तुरंत संचालक मण्डल को दे। संचालक मंडल के निम्न सदस्य है:-
i) सर्व श्री नीलम भट्ट
ii) भास्कर नौटियाल
iii) सुंदर लाल नौटियाल
iv) मोहन लाल नौटियाल
v) विजय नौटियाल
11) सेवक का कार्यकाल शुरुआत में 6 महीने का होगा ।उसके बाद उसके कार्य की समीक्षा के बाद कार्यकाल बढ़ाया जाएगा।
12) सेवक के कार्य का समय : शीतकाल : सुवह 10 बजे से सायं 4-30 बजे तक । ग्रीष्मकाल : सुवह 9 बजे से 5-30 बजे तक।
13) सेवक का शुरुआती वेतन रु.12000/- होगा। कार्य समीक्षा के बाद वेतन बढ़ाया जाएगा।
14) मंदिर में रहने वाले स्वामी वेदपुरी या अन्य किसी संत की उचित सलाह को सेवक को मानना होगा।
15) सेवक अपने खानपान का स्वयं करे । मंदिर के चढ़ावा, राशन, श्रीफल आदि पर सेवक का अधिकार नही होगा।
16) सेवक यह सुनिश्चित करे कि सभी भक्त मंदिर के प्रांगण के बाहर खानपान करे । मन्दिर के प्रांगण में खानपान, धूम्रपान निषेध है।
17) गर्भ ग्रह में केवल रावल (पुजारी) ही बैठ सकते हैं। भक्तों का गर्भ गृह में प्रवेश वर्जित है। पुजारी की गद्दी पर सेवक नहीं बैठेगा। प्रसाद वितरण, कलावा, टीका आदि गर्भ गृह के बाहर से करना होगा।