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देवी षोडशी दस महाविद्याओं में एक महाविद्या है।देवी षोडशी को त्रिपुर सुंदरी (तीनो लोको में सुंदर) के रूप से भी जाना जाता है। इनको ललिता एवं राज राजेश्वरी  नाम से भी जाना जाता है।दैवी राज राजेश्वरी की आराधना से शारीरिक, मानसिक शक्ति का विकास होता है। मनोकामना पूर्ण होती है तथा घर मे सुख शान्ति तथा सम्रद्धि आती है।
काली माँ (पंचाक्षरी मन्त्र )
ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं हूँ फट्॥
तारा माँ (पंचाक्षरी मन्त्र )
ॐ ह्रीं त्रीं ह्रुं फट्॥
षोडशी माँ (पंचाक्षरी मन्त्र )
ऐं क्लीं सौः सौः क्लीं॥
भुवनेश्वर्यै माँ (पंचाक्षरी मन्त्र )
ॐ श्रीं ऐं क्लीं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥
भैरवी माँ (अष्टाक्षरी मन्त्र )
हसैं हसकरीं हसैं॥
छिन्नमस्ता माँ (पंचाक्षरी मन्त्र )
ॐ हूं स्वाहा ॐ॥
धूमावती माँ (अष्टाक्षरी मन्त्र )
धूं धूं धूमावती स्वाहा॥
बगलामुखी माँ (पंचाक्षरी मन्त्र )
ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्॥
मातंगी माँ (अष्टाक्षरी मन्त्र )
कामिनी रञ्जिनी स्वाहा॥
कमला माँ (पंचाक्षरी मन्त्र )
श्रीं क्लीं श्रीं नमः॥

आयोजन

मंदिर से संवंधित बैठकों तथा आयोजनों का विवरण तथा छायाचित्र।

गंगा दशहरा सामुहिक जात

दिनाँक: 20/06/2021

सभी माँ राज राजेश्वरी के भक्तों को नमस्कार। आज दिनांक 20/06/2021 गंगा दशहरा…

वार्शिक बैठक (14 मार्च 2021)

दिनाँक: 14/03/2021

दिनांक 14 मार्च को माँ राज राजेश्वरी ट्रस्ट की बैठक मंदिर प्रांगण…

नवरात्रि के प्रवंधन तथा व्यवस्था पर विचार

दिनाँक: 07/03/2020

दिनाँक 7 मार्च 2020 को माँ राज राजेश्वरी मंदिर ट्रस्ट की बैठक…

मंदिर की गैलरी

आवश्यक निर्माण कार्य

मां राज राजेश्वरी मंदिर में निम्न लिखित निर्माण कार्य अति आवश्यक है।

मुख्य द्वार का निर्माण कार्य माँ राज राजेश्वरी ट्रस्ट के आजीवन सदस्य के सौजन्य से किया जा रहा है। जो कि दिनाँक 06/12/2019 से शुरू हो चुका है।

मंदिर में ग्रेनाइट की टाइलें लगवाना) के लिए श्री विजय कुमार नौटियाल जी पहले ही सहमति दे चुके हैं

मंदिर में बड़ी रसोईघर के निर्माण हेतु श्री सोबन सिंह कठैत सुपुत्र श्री चित्र सिंह कठैत (धनसाणी) ने सहमति दे दी है।





मंदिर अनुसूची

वर्ष में दो बार नवरात्रों का आयोजन तथा मंदिर में विशेष पूजा तथा माता का श्रृंगार किया जाता  है। इसके अलावा व्यक्ति गत जात एवं सामुहिक जात में भी पूजा तथा श्रृंगार किया जाता है। नवरात्रों तथा जात के दौरान माता की मूर्तियां का प्रस्थान मांदरा गांव से चुलागढ़ के लिये चांदी के ढोल दमाऊं के साथ किया जाता है। तथा वापसी भी ढोल दमाऊं के साथ ही कि जाती है।

नवरात्रि (चैत्र मास)

25 मार्च से 3 अप्रैल 2020

नवरात्रि (शारदीय)

अक्टूबर 17 से 26, 2020
sunrise

मंदिर खुलने का समय

9:00 AM
sunset

मंदिर बंद होने का समय

5:00 PM

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